किडनी स्टोन के लिए लेज़र सर्जरी कितनी सुरक्षित है?

किडनी स्टोन आज के समय में एक आम लेकिन बेहद तकलीफदेह समस्या बन चुका है। अचानक तेज दर्द, पेशाब में जलन या खून आना, ये संकेत हैं कि आपको किडनी स्टोन हो सकता है। पारंपरिक सर्जरी में लंबा समय, ज्यादा दर्द और रिकवरी पीरियड की वजह से अब लोग आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं। इन्हीं आधुनिक तरीकों में लेज़र सर्जरी ने यूरोलॉजी की दुनिया में क्रांति ला दी है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे- किडनी स्टोन के लिए लेज़र सर्जरी क्या है, इसकी प्रक्रिया कैसे होती है, इसके फायदे और सुरक्षा के पहलू और क्यों यह आज सबसे भरोसेमंद इलाज माना जाता है।

किडनी स्टोन क्या है और यह कैसे बनता है?

किडनी स्टोन मिनरल्स और साल्ट के छोटे-छोटे कणों का जमाव होता है, जो आपस में मिलकर ठोस पत्थर का रूप ले लेते हैं। यह पत्थर बहुत छोटा भी हो सकता है या इतना बड़ा कि दर्द और तकलीफ पैदा कर दे।

आमतौर पर इसके कारण होते हैं:

  • पानी की कमी
  • अधिक नमक या प्रोटीन वाला आहार
  • यूरिनरी संक्रमण
  • अनुवांशिक कारण

लक्षणों में शामिल हैं: पेट या पीठ में तेज दर्द, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून या बदबू या उल्टी आना|

लेज़र सर्जरी क्या होती है?

लेज़र सर्जरी, जिसे Laser Lithotripsy कहा जाता है, एक आधुनिक तकनीक है जिसमें लेज़र बीम की मदद से किडनी स्टोन को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। इसके बाद ये छोटे टुकड़े मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं।

प्रक्रिया का सामान्य तरीका:

  1. रोगी को हल्की या सामान्य एनेस्थीसिया दी जाती है।
  2. यूरोलॉजिस्ट एक पतली ट्यूब (यूरेथ्रोस्कोप) मूत्र मार्ग से किडनी तक भेजते हैं।
  3. लेज़र बीम स्टोन को तोड़ देता है।
  4. टूटे हुए टुकड़े मूत्र के साथ बाहर निकल जाते हैं।

यह प्रक्रिया आमतौर पर 1–2 घंटे में पूरी हो जाती है और अस्पताल में रहने का समय भी कम होता है।

लेज़र सर्जरी बनाम पारंपरिक सर्जरी

पारंपरिक सर्जरी में पेट या पीठ पर बड़ी चीरा लगती है, जिससे रिकवरी लंबी और दर्दनाक हो सकती है। वहीं लेज़र सर्जरी में:

  • कोई बड़ा चीरा नहीं लगता
  • दर्द और रक्तस्राव बहुत कम होता है
  • मरीज जल्दी अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाता है
  • रिकवरी समय कम होता है

क्या लेज़र सर्जरी सुरक्षित है?

लेज़र सर्जरी अत्याधुनिक तकनीक है और इसका सफलता दर 95% से अधिक है। यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसका मतलब है कि इसमें शरीर पर कम चोट लगती है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है।

डॉ. दीपांशु जैसे अनुभवी यूरोलॉजिस्ट आधुनिक उपकरणों के साथ इसे करते हैं, जिससे प्रक्रिया और भी सुरक्षित बनती है।

सुरक्षा के मुख्य पहलू:

  • उच्च तकनीक वाले लेज़र उपकरण
  • अनुभव और विशेषज्ञता
  • उचित प्री-ऑप और पोस्ट-ऑप देखभाल

लेज़र सर्जरी के फायदे

  1. कम दर्द और डिस्चार्ज समय: ज्यादातर मरीज 24–48 घंटे में घर लौट सकते हैं।
  2. तेज़ रिकवरी: कार्य और जीवन में जल्दी वापसी।
  3. कम रक्तस्राव: पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले।
  4. दोबारा स्टोन बनने की संभावना कम।
  5. कम अस्पताल में रुकने का समय।

कब लेज़र सर्जरी जरूरी होती है?

लेज़र सर्जरी की सलाह आमतौर पर तभी दी जाती है जब:

  • स्टोन का आकार बड़ा हो (आम तौर पर 5mm से ऊपर)।
  • स्टोन मूत्र मार्ग में फंसा हो और दर्द व संक्रमण पैदा कर रहा हो।
  • दवाइयों या अन्य उपचारों से आराम न मिले।
  • बार-बार स्टोन बनने की समस्या हो।

रिकवरी और ऑपरेशन के बाद की देखभाल

लेज़र सर्जरी के बाद मरीज को कुछ दिन आराम करना चाहिए और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना चाहिए:

  • पर्याप्त पानी पीना (दिन में 2–3 लीटर)
  • डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाइयों को नियमित रूप से लेना
  • भारी काम या व्यायाम से बचना
  • नियमित फॉलो-अप विज़िट

Dr. Deepanshu से परामर्श क्यों करें?

Dr. Deepanshu यूरोलॉजी के क्षेत्र में अनुभव और विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं। उनके पास अत्याधुनिक लेज़र तकनीक और मरीज-केंद्रित इलाज का एक उत्कृष्ट रिकॉर्ड है। वे हर मरीज की समस्या को व्यक्तिगत रूप से समझकर  सही योजना बनाते हैं, जिससे उपचार सुरक्षित और प्रभावी होता है।

निष्कर्ष

किडनी स्टोन आज के समय में तेजी से बढ़ती समस्या है, लेकिन आधुनिक तकनीक जैसे लेज़र सर्जरी इस दर्दनाक समस्या का एक सुरक्षित, तेज़ और असरदार समाधान है। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें दर्द कम, रिकवरी तेज़ और सफलता दर अधिक होती है।

डॉ. दीपांशु जैसे अनुभवी यूरोलॉजिस्ट के मार्गदर्शन में लेज़र सर्जरी न केवल सुरक्षित है बल्कि आपकी जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने का एक अहम कदम है। समय रहते इलाज कराने से आप इस समस्या को आसानी से मात दे सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ सकते हैं।

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