एक किडनी वाले मरीज के लिए कौन सी सर्जरी सुरक्षित है?
एक किडनी के साथ जीवन जीना पूरी तरह संभव है, लेकिन इसमें कुछ सावधानी बरतनी बहुत ज़रूरी है। कई मरीजों को एक किडनी होने पर सबसे बड़ा डर यह रहता है कि “अगर कभी सर्जरी करनी पड़ी तो क्या यह सुरक्षित होगी?” असल में, एक किडनी वाले मरीज के लिए सर्जरी पूरी तरह मुमकिन है, [...]

एक किडनी के साथ जीवन जीना पूरी तरह संभव है, लेकिन इसमें कुछ सावधानियां बरतनी बहुत ज़रूरी हैं। कई मरीजों को एक किडनी होने पर सबसे बड़ा डर यह रहता है कि “अगर कभी कोई ऑपरेशन या सर्जरी करनी पड़ी तो क्या यह सुरक्षित होगी?” एक किडनी वाले मरीज के लिए सर्जरी पूरी तरह मुमकिन है, बशर्ते कि सर्जरी से पहले किडनी की कार्यक्षमता की पूरी जांच की जाए और आधुनिक, कम जोखिम वाली तकनीकों का उपयोग किया जाए।
एक किडनी के साथ सामान्य जीवन — क्या यह संभव है?
एक स्वस्थ किडनी शरीर की सभी ज़रूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम होती है। बहुत से लोग जन्म से एक ही किडनी के साथ पैदा होते हैं (Renal Agenesis), जबकि कुछ लोगों की एक किडनी बीमारी, चोट या दान (Donation) के कारण निकालनी पड़ती है। सही खान-पान, पर्याप्त पानी, नियमित जाँच और सही मेडिकल केयर से एक किडनी वाला व्यक्ति भी सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकता है।
सर्जरी की आवश्यकता कब पड़ती है?
एक किडनी वाले मरीजों को भी अन्य लोगों की तरह विभिन्न स्वास्थ्य कारणों से सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है:
- सामान्य सर्जिकल समस्याएं: हर्निया, गॉल ब्लैडर में पथरी, या अपेंडिक्स।
- यूरोलॉजिकल समस्याएं: प्रोस्टेट बढ़ना, मूत्राशय (Bladder) से जुड़ी समस्याएं या एकल किडनी में ही पथरी बनना।
- गंभीर स्थितियां: चोट, ट्यूमर या किसी अन्य अंग की सर्जरी।
सर्जरी से पहले ज़रूरी मेडिकल जांचें
किसी भी ऑपरेशन से पहले किडनी की वर्तमान स्थिति और उसकी काम करने की क्षमता को आंकना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम होता है:
- ब्लड टेस्ट (KFT): सीरम क्रिएटिनिन (Serum Creatinine), यूरिया और eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) से किडनी के फिल्ट्रेशन रेट का पता चलता है।
- यूरिन टेस्ट: पेशाब में प्रोटीन (Proteinuria) या इन्फेक्शन की जांच के लिए।
- इमेजिंग (Ultrasound / CT Scan): एकल किडनी के सटीक आकार, संरचना और किसी भी प्रकार की रुकावट का पता लगाने के लिए। पढ़ें किडनी की बीमारियों में अल्ट्रासाउंड और CT स्कैन की भूमिका।
- एनेस्थीसिया प्री-चेकअप (PAC): एनेस्थीसिया की दवाओं का किडनी पर कोई विपरीत असर न पड़े, इसके लिए विशेषज्ञ की सलाह ली जाती है।
एक किडनी वाले मरीजों के लिए सुरक्षित सर्जरी तकनीकें
आज की आधुनिक और मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चीरे वाली) तकनीकें एक किडनी वाले मरीजों के लिए बेहद सुरक्षित मानी जाती हैं:
1. मिनिमली इनवेसिव व लैप्रोस्कोपिक सर्जरी
गॉल ब्लैडर, अपेंडिक्स या हर्निया जैसे ऑपरेशनों के लिए लैप्रोस्कोपिक (की-होल) तकनीक सबसे सुरक्षित है। इसमें ब्लीडिंग कम होती है और रिकवरी तेज़ी से होती है।
2. लेज़र किडनी स्टोन सर्जरी (RIRS / URSL)
यदि एकल किडनी के भीतर ही पथरी बन जाए, तो ओपन सर्जरी की बजाय बिना किसी बाहरी चीरे के प्राकृतिक मूत्र मार्ग से की जाने वाली लेज़र तकनीकें—जैसे RIRS (Retrograde Intrarenal Surgery)—का इस्तेमाल किया जाता है। इससे किडनी के स्वस्थ टिशू को नुकसान नहीं पहुँचता। पढ़ें RIRS लेज़र सर्जरी की सफलता दर और प्रक्रिया।
3. एंडोस्कोपिक यूरोलॉजिकल सर्जरी
बढ़े हुए प्रोस्टेट या ब्लैडर की समस्याओं के लिए लेज़र तकनीक (जैसे HoLEP) का उपयोग किया जाता है, जिससे रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा न के बराबर होता है। पढ़ें क्या प्रोस्टेट बढ़ने पर हर बार सर्जरी जरूरी होती है।
किन मामलों में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है?
कुछ जटिल ऑपरेशनों में विशेष निगरानी रखनी पड़ती है:
- लंबे समय तक चलने वाले ऑपरेशन: जिनमें एनेस्थीसिया का डोज ज्यादा हो और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव की संभावना हो।
- अधिक रक्तस्राव वाले ऑपरेशन: ऐसे मामलों में यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) मिलकर सर्जरी की योजना बनाते हैं ताकि किडनी के ब्लड फ्लो में कोई कमी न आए।
पोस्ट-ऑपरेटिव केयर (सर्जरी के बाद देखभाल)
- हाइड्रेशन का ध्यान रखें: डॉक्टर के निर्देशानुसार पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं ताकि किडनी से एनेस्थीसिया और दवाइयों के अवशेष आसानी से बाहर निकल सकें। पढ़ें किडनी स्टोन से बचने के लिए कितना पानी पीएं।
- किडनी-फ्रेंडली दवाएं: केवल वही दर्द निवारक और एंटीबायोटिक्स लें जो डॉक्टर द्वारा सुझाई गई हों। ओवर-द-काउंटर मिलने वाली NSAIDs (जैसे डिक्लोफेनेक या इबूप्रोफेन) से बचें क्योंकि वे किडनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- सही डाइट का पालन करें: नमक और अत्यधिक प्रोटीन का सेवन नियंत्रित रखें। पढ़ें किडनी और ब्लैडर को हेल्दी रखने के लिए बेस्ट डाइट।
- नियमित फॉलो-अप: ऑपरेशन के बाद यूरिन आउटपुट और क्रिएटिनिन लेवल की जांच ज़रूर करवाएं।
विशेषज्ञ परामर्श: सुरक्षित सर्जरी और देखभाल
एक किडनी वाले मरीज के लिए सर्जरी कराना पूरी तरह सुरक्षित है, बशर्ते सही योजना, आधुनिक स्कारलेस तकनीकों और अनुभवी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में इलाज किया जाए। गुड़गांव और दिल्ली एनसीआर में एडवांस्ड यूरोलॉजी और एंडोयूरोलॉजी परामर्श के लिए डॉ. दीपांशु गुप्ता से संपर्क करें। 15 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, डॉ. दीपांशु उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए कस्टमाइज्ड और मिनिमली इनवेसिव ट्रीटमेंट प्लान प्रदान करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या एक ही किडनी होने पर गॉल ब्लैडर या अपेंडिक्स की सर्जरी कराई जा सकती है?
हाँ, लैप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करके ये सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित तरीके से की जा सकती हैं। सर्जरी से पहले किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) कराना अनिवार्य होता है।
यदि एक ही किडनी में पथरी हो जाए तो क्या करना चाहिए?
एकल किडनी में पथरी होने पर तुरंत यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। इसे निकालने के लिए बिना चीरे वाली लेज़र तकनीक (RIRS या URSL) सबसे सुरक्षित विकल्प मानी जाती है।
एक किडनी वाले मरीजों को कौन सी दवाइयों से बचना चाहिए?
एक किडनी वाले मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं (NSAIDs जैसे Ibuprofen, Naproxen, Diclofenac) और अत्यधिक सप्लीमेंट्स नहीं लेने चाहिए, क्योंकि इनसे किडनी पर दबाव पड़ता है।
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