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प्रोस्टेट बढ़ने पर हमेशा सर्जरी ज़रूरी है क्या?

क्या आपको पेशाब बार-बार आने की परेशानी होती है, या रात में कई बार उठना पड़ता है? अगर हां, तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का संकेत हो सकता है। बहुत से पुरुष जैसे ही यह सुनते हैं कि उनका प्रोस्टेट बढ़ गया है, वे डर जाते हैं कि अब सर्जरी ही एकमात्र समाधान है।

Dr. Deepanshu Gupta13 Dec 2025Quick read
प्रोस्टेट बढ़ने पर हमेशा सर्जरी ज़रूरी है क्या?

क्या आपको पेशाब बार-बार आने की परेशानी होती है, या रात में कई बार उठना पड़ता है? अगर हां, तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का संकेत हो सकता है। बहुत से पुरुष जैसे ही यह सुनते हैं कि उनका प्रोस्टेट बढ़ गया है, वे डर जाते हैं कि अब सर्जरी ही एकमात्र समाधान है। लेकिन सच्चाई यह है कि हर केस में सर्जरी जरूरी नहीं होती। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का आकार बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, और कई मामलों में इसे दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रोस्टेट क्या है और इसका मुख्य कार्य क्या है?

प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि है जो पुरुषों की प्रजनन प्रणाली का हिस्सा होती है। यह ब्लैडर (मूत्राशय) के ठीक नीचे और मूत्रनली (urethra) के चारों ओर स्थित होती है। इसका मुख्य कार्य एक विशेष तरल पदार्थ बनाना है जो स्पर्म (शुक्राणु) को पोषण और सुरक्षा प्रदान करता है। सामान्य स्थिति में इसका आकार अखरोट जितना होता है, लेकिन उम्र के साथ इसमें वृद्धि होने लगती है — जिसे BPH (Benign Prostatic Hyperplasia) कहा जाता है। यह एक सामान्य, गैर-कैंसरयुक्त वृद्धि है जो 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में आम पाई जाती है।

प्रोस्टेट बढ़ने के मुख्य कारण

  • उम्र बढ़ना: 50 वर्ष की आयु के बाद हार्मोनल बदलाव की वजह से ग्रंथि का आकार बढ़ने लगता है।
  • हार्मोनल असंतुलन: टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन के स्तर में स्वाभाविक बदलाव।
  • अनुवांशिक कारण (Genetics): परिवार में BPH की हिस्ट्री होने पर जोखिम बढ़ जाता है।
  • जीवनशैली: कम पानी पीना, अत्यधिक चाय/कॉफी का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी।
  • असंतुलित आहार व मोटापा: अधिक फैट और कम फाइबर युक्त आहार भी प्रोस्टेट स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

बढ़े हुए प्रोस्टेट के लक्षण

  • बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना (विशेषकर रात के समय)
  • पेशाब शुरू करने या रोकने में कठिनाई या जोर लगाना पड़ना
  • पेशाब की धार पतली होना या रुक-रुक कर आना
  • ऐसा महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है
  • पेशाब के अंत में बूंद-बूंद टपकना

इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से ब्लैडर या किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। पढ़ें हाइड्रोनफ्रोसिस (किडनी की सूजन) के कारण और इलाज

क्या हर केस में सर्जरी जरूरी होती है?

नहीं, हर मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं होती। BPH की शुरुआती अवस्था में दवाइयों और जीवनशैली में सुधार से लक्षणों को पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है।

सर्जरी की आवश्यकता कब नहीं होती?

  • पेशाब में रुकावट या लक्षण बहुत हल्के हों।
  • ब्लैडर या किडनी पर कोई विपरीत असर न पड़ रहा हो।
  • दवाइयों के नियमित सेवन से पर्याप्त आराम मिल रहा हो।

सर्जरी की आवश्यकता कब पड़ती है?

  • मूत्र पूरी तरह से रुक जाए (Acute Urinary Retention)।
  • बार-बार यूरिनरी इंफेक्शन (UTI) या ब्लैडर इंफेक्शन हो रहा हो।
  • ब्लैडर में पथरी (Bladder Stones) बनने लगे।
  • पेशाब रुकने से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगे। पढ़ें किडनी डैमेज से बचाव
  • दवाओं के नियमित सेवन के बावजूद लक्षण लगातार बिगड़ रहे हों।

बिना सर्जरी के इलाज के विकल्प (Non-Surgical Treatments)

1. जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes)

  • ड्रिंक टाइमिंग सेट करें: दिनभर पर्याप्त पानी पीएं, लेकिन रात को सोने से 2 घंटे पहले तरल पदार्थों का सेवन कम करें। पढ़ें किडनी और ब्लैडर को हेल्दी रखने के लिए बेस्ट डाइट
  • कैफीन और अल्कोहल सीमित करें: चाय, कॉफी और शराब मूत्राशय में जलन पैदा करते हैं और पेशाब की आवृत्ति बढ़ाते हैं।
  • पेशाब न रोकें: इच्छा होने पर तुरंत शौचालय जाएं।
  • कब्ज से बचें: फाइबर युक्त आहार लें ताकि पेट साफ रहे और मूत्राशय पर दबाव न पड़े।

2. दवाइयाँ (Medications)

  • Alpha-blockers: ये दवाएं मूत्रमार्ग और प्रोस्टेट की मांसपेशियों को रिलैक्स करती हैं, जिससे पेशाब आसानी से बाहर निकलता है।
  • 5-Alpha Reductase Inhibitors: ये दवाएं प्रोस्टेट ग्रंथि के आकार को धीरे-धीरे कम करती हैं।

3. नियमित मॉनिटरिंग (Watchful Waiting)

यदि प्रोस्टेट का आकार बहुत अधिक नहीं बढ़ा है और लक्षण हल्के हैं, तो नियमित अल्ट्रासाउंड औरPSA (Prostate-Specific Antigen) टेस्ट के ज़रिए स्थिति पर नज़र रखी जाती है।

कब सर्जरी सबसे अच्छा विकल्प बनती है?

जब दवाओं से राहत न मिले या जटिलताएँ बढ़ने लगें, तब आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का उपयोग किया जाता है। आज के समय में HoLEP (Holmium Laser Enucleation of the Prostate) और TURP (Transurethral Resection of the Prostate) जैसी एंडोस्कोपिक लेज़र प्रक्रियाएं बेहद सुरक्षित हैं। इनमें बिना किसी बाहरी चीरे के, मूत्रमार्ग के ज़रिए बढ़े हुए प्रोस्टेट टिशू को हटा दिया जाता है, जिससे रिकवरी तेज़ होती है।

विशेषज्ञ परामर्श: सही समय पर सही निर्णय

प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या हर व्यक्ति में अलग होती है। शुरुआती चरणों में सही जीवनशैली और मेडिकल मैनेजमेंट से सर्जरी की संभावना को टाला जा सकता है। गुड़गांव और दिल्ली एनसीआर में प्रोस्टेट व एंडोयूरोलॉजी इलाज के लिए डॉ. दीपांशु गुप्ता से परामर्श करें। 15 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, डॉ. दीपांशु प्रत्येक मरीज की स्थिति के अनुसार कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान (मेडिकल मैनेजमेंट या एडवांस लेज़र HoLEP) प्रदान करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या BPH आगे चलकर कैंसर बन सकता है?

नहीं, BPH एक बेनाइन (गैर-कैंसरयुक्त) स्थिति है। यह प्रोस्टेट कैंसर का कारण नहीं बनती है, हालांकि दोनों स्थितियों के लक्षण समान हो सकते हैं, इसलिए PSA टेस्ट और जांच कराना ज़रूरी है।

क्या दवाओं से बढ़ा हुआ प्रोस्टेट पूरी तरह ठीक हो सकता है?

दवाएं प्रोस्टेट के आकार को नियंत्रित कर सकती हैं और मांसपेशियों को रिलैक्स करके पेशाब के प्रवाह को सामान्य बना सकती हैं, जिससे मरीज बिना सर्जरी के सामान्य जीवन जी सकता है।

प्रोस्टेट की लेज़र सर्जरी (HoLEP) के कितने दिन बाद रिकवरी होती है?

HoLEP जैसी लेज़र सर्जरी के बाद मरीज को 24 से 48 घंटे में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है और 3 से 5 दिनों में मरीज हल्की दिनचर्या में वापस लौट सकते हैं।

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