एक ही किडनी में कई Stones हों तो क्या एक Surgery में सभी निकल सकते हैं?
एक ही किडनी में कई पथरी होने पर क्या सभी को एक ही सर्जरी में निकाला जा सकता है? जानें RIRS और PCNL जैसे उपचार विकल्प, किन परिस्थितियों में एक से अधिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है और इलाज का फैसला किन बातों पर निर्भर करता है।

अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन की रिपोर्ट में जब लिखा आता है "Multiple calculi in right kidney" या "बाईं किडनी में 4 से 5 पथरियां", तो मरीज़ अक्सर घबरा जाते हैं। पहला सवाल यही होता है: "क्या हर पथरी के लिए अलग ऑपरेशन होगा? क्या बार बार अस्पताल आना पड़ेगा?"
अच्छी खबर यह है कि ज़्यादातर मामलों में एक ही किडनी की कई पथरियां एक ही सर्जरी में निकाली जा सकती हैं। आधुनिक लेज़र सर्जरी, खासकर RIRS, में दूरबीन किडनी के अंदर अलग अलग हिस्सों तक पहुंच सकती है और एक ही बेहोशी में कई पथरियों को तोड़कर निकाला जा सकता है।
लेकिन यह हर मरीज़ में एक ही सत्र में संभव नहीं होता। फ़ैसला पथरियों की गिनती से नहीं, बल्कि कुछ और बातों से होता है। यह लेख बताता है कि वे बातें क्या हैं।
गिनती नहीं, कुल पथरी का बोझ मायने रखता है
मरीज़ अक्सर गिनती पर ध्यान देते हैं: "पांच पथरियां हैं, बहुत ज़्यादा हैं।" लेकिन डॉक्टर के लिए असली सवाल है कुल stone burden, यानी सारी पथरियां मिलाकर कितना पत्थर है।
एक आसान उदाहरण:
- पांच पथरियां, हर एक 3 से 4 mm की: कुल बोझ कम। एक सत्र में आराम से साफ़ हो सकती हैं।
- दो पथरियां, एक 15 mm और एक 12 mm की: गिनती कम, लेकिन कुल बोझ बहुत ज़्यादा।
यानी दो बड़ी पथरियां, पांच छोटी पथरियों से ज़्यादा मुश्किल हो सकती हैं।
एक और बात समझना ज़रूरी है। पथरी का आयतन (volume) उसके साइज़ के साथ बहुत तेज़ी से बढ़ता है। 10 mm की पथरी में 5 mm की पथरी से लगभग आठ गुना ज़्यादा पत्थर होता है। इसलिए रिपोर्ट में लिखे हर साइज़ को सिर्फ़ जोड़ लेना पूरी तस्वीर नहीं देता, लेकिन एक मोटा अंदाज़ा ज़रूर देता है।
आमतौर पर जब सारी पथरियों का कुल आकार लगभग 2 cm तक होता है, तो RIRS से एक सत्र में साफ़ होने की संभावना अच्छी रहती है। इससे ज़्यादा होने पर या तो दो सत्र लग सकते हैं, या दूसरा तरीका बेहतर रहता है। देखें किडनी स्टोन कितनी बड़ी हो सकती है।
पथरियां किडनी में कहाँ हैं, यह भी उतना ही ज़रूरी है
किडनी अंदर से एक पेड़ की शाखाओं जैसी होती है। बीच में एक बड़ा हिस्सा होता है जिसे renal pelvis कहते हैं, और उससे ऊपर, बीच और नीचे की तरफ़ छोटी छोटी शाखाएं निकलती हैं जिन्हें calyx कहते हैं।
अगर सारी पथरियां एक ही हिस्से में या pelvis में हैं: दूरबीन एक जगह रहकर सबको तोड़ सकती है। एक सत्र में आसानी से हो जाता है।
अगर पथरियां ऊपर, बीच और नीचे, अलग अलग शाखाओं में बिखरी हैं: दूरबीन को हर शाखा में अलग से जाना पड़ता है। इसमें ज़्यादा समय लगता है, लेकिन अनुभवी हाथों में फिर भी अक्सर एक सत्र में हो जाता है।
अगर पथरियां निचली शाखा (lower calyx) में हैं: यह सबसे मुश्किल जगह है। निचली शाखा तक दूरबीन को काफ़ी मोड़ना पड़ता है, और टूटे हुए टुकड़े गुरुत्वाकर्षण की वजह से वहीं बैठे रह जाते हैं। अगर निचली शाखा का कोण बहुत तीखा हो, तो कई बार दूसरा तरीका बेहतर रहता है।
पथरी की जगह क्यों इतनी ज़रूरी है, यह विस्तार से पढ़ें पथरी की जगह क्यों मायने रखती है।
पथरी की कठोरता
सीटी स्कैन में हर पथरी की Hounsfield Unit (HU) लिखी होती है, जो बताती है कि पथरी कितनी सख़्त है। बहुत सख़्त पथरी को लेज़र से तोड़ने में ज़्यादा समय लगता है। अगर कई पथरियां हैं और सब बहुत सख़्त हैं, तो कुल समय काफ़ी बढ़ जाता है।
इसलिए कई पथरियों वाले मामलों में सिर्फ़ अल्ट्रासाउंड नहीं, बल्कि बिना कॉन्ट्रास्ट वाला सीटी स्कैन (NCCT KUB) ज़रूर करवाना चाहिए। इससे हर पथरी का सही साइज़, जगह और कठोरता पता चलती है। देखें अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की भूमिका।
Suction वाली तकनीक ने क्या बदला है
पहले कई पथरियों की सबसे बड़ी समस्या थी टूटे हुए टुकड़े। हर पथरी तोड़ने के बाद उसके टुकड़े या तो एक एक करके बास्केट से निकाले जाते थे, या उम्मीद की जाती थी कि मरीज़ उन्हें पेशाब में निकाल देगा। कई पथरियों में यह बहुत लंबा काम था, और टुकड़े अक्सर पीछे छूट जाते थे।
अब suction वाली स्टेंट शीथ (FANS) लेज़र से टूटे हुए बारीक कणों और टुकड़ों को सर्जरी के दौरान ही बाहर खींच लेती है। इसकी नोक मुड़ सकती है और किडनी की अलग अलग शाखाओं तक जा सकती है। इससे:
- कई पथरियां एक सत्र में साफ़ करना ज़्यादा आसान हुआ है
- टुकड़े पीछे छूटने की संभावना कम हुई है
- किडनी के अंदर दबाव कम रहता है, जिससे सर्जरी के बाद बुखार और इन्फेक्शन का खतरा घटता है
पढ़ें FANS RIRS और Suction RIRS और जटिल पथरी में RIRS की सफलता दर।
कब एक से ज़्यादा सत्र लग सकते हैं
ईमानदारी से यह बताना ज़रूरी है कि कुछ मामलों में दो सत्र बेहतर होते हैं:
- कुल पथरी का बोझ बहुत ज़्यादा हो, आमतौर पर 2 cm से काफ़ी ऊपर
- कई पथरियां बहुत सख़्त हों
- पथरियां निचली शाखा में तीखे कोण पर हों
- सर्जरी का समय बहुत लंबा खिंच रहा हो। लंबा समय मतलब किडनी में ज़्यादा देर पानी का दबाव और इन्फेक्शन का ज़्यादा खतरा। अनुभवी सर्जन ऐसे में बाकी काम अगली बार के लिए छोड़ देते हैं। यह नाकामी नहीं, बल्कि मरीज़ की सुरक्षा के लिए सही फ़ैसला है
- सर्जरी के दौरान खून या धुंधलापन से साफ़ दिखाई देना बंद हो जाए
- पेशाब में इन्फेक्शन हो। पहले इन्फेक्शन का इलाज ज़रूरी है। देखें सर्जरी से पहले Urine Culture क्यों ज़रूरी है
अगर दो सत्र की ज़रूरत लगती है, तो एक अच्छा सर्जन सर्जरी से पहले ही मरीज़ को यह बता देता है, ताकि मरीज़ मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहे। दूसरा सत्र आमतौर पर कुछ हफ़्तों बाद, अक्सर स्टेंट निकालने के समय के आसपास, किया जाता है।
कब RIRS की जगह PCNL बेहतर है
अगर किडनी में पथरियों का कुल बोझ बहुत ज़्यादा है, या पथरी शाखाओं में फैलकर हिरण के सींग जैसी (staghorn) बन गई है, तो Mini PCNL अक्सर बेहतर विकल्प होता है। इसमें पीठ से एक छोटा, लगभग एक सेंटीमीटर का रास्ता बनाकर सीधे किडनी तक पहुंचा जाता है, और बड़ी मात्रा में पथरी एक ही सत्र में निकाली जा सकती है।
कुछ जटिल मामलों में दोनों तरीके एक साथ भी इस्तेमाल होते हैं, ताकि PCNL बड़ा हिस्सा साफ़ करे और लचीली दूरबीन उन शाखाओं तक पहुंचे जहां PCNL के सीधे औज़ार नहीं जा सकते।
पढ़ें Staghorn पथरी कैसे निकाली जाती है, 2 से 4 cm पथरी का इलाज और बड़ी पथरी निकालने का सबसे अच्छा तरीका।
क्या ESWL से कई पथरियां टूट सकती हैं?
आमतौर पर यह अच्छा विकल्प नहीं है। ESWL में बाहर से तरंगें भेजकर पथरी तोड़ी जाती है, और फिर टुकड़ों को मरीज़ को खुद पेशाब में निकालना होता है। कई पथरियों में बहुत सारे टुकड़े बनते हैं, जिनसे हफ़्तों तक दर्द हो सकता है, और अक्सर कई सत्र लगते हैं। खासकर निचली शाखा की पथरियों में टुकड़े निकल ही नहीं पाते।
बहुत छोटी पथरियां, क्या उन्हें भी निकालना ज़रूरी है?
कई रिपोर्ट में लिखा होता है "multiple tiny calculi" या "microliths", यानी 2 से 3 mm की कई बहुत छोटी पथरियां।
अगर ये कोई तकलीफ़ नहीं दे रहीं, रुकावट नहीं कर रहीं और इन्फेक्शन नहीं है, तो कई बार इन पर नज़र रखी जा सकती है और रोकथाम पर ध्यान दिया जाता है।
लेकिन अगर किसी बड़ी पथरी के लिए सर्जरी हो ही रही है, तो उसी सत्र में छोटी पथरियों को भी साफ़ करना समझदारी है। वजह साफ़ है: किडनी में बची कोई भी छोटी पथरी या टुकड़ा अगली पथरी का बीज बनता है। जब दूरबीन पहले से अंदर है, तो उन्हें छोड़ने का कोई फ़ायदा नहीं।
सर्जरी के बाद क्या होता है
- आमतौर पर एक रात अस्पताल में
- अक्सर एक अस्थायी DJ स्टेंट डाला जाता है, जो 1 से 3 हफ़्ते में एक छोटी प्रक्रिया से निकलता है। देखें DJ स्टेंट क्या है और क्या DJ स्टेंट निकालना दर्दनाक है
- कुछ दिन पेशाब में हल्का खून और जलन, जो सामान्य है
- ऑफिस का काम आमतौर पर 3 से 5 दिन में
सबसे ज़रूरी: सर्जरी के बाद फ़ॉलो अप स्कैन। कई पथरियों वाले मरीज़ों में यह और भी ज़रूरी है, क्योंकि यही बताता है कि हर शाखा सच में साफ़ हुई या नहीं। "सर्जरी अच्छी रही" और "किडनी पूरी तरह पथरी मुक्त है", ये दो अलग बातें हैं। देखें सर्जरी के बाद फ़ॉलो अप क्यों ज़रूरी है।
सर्जरी कितनी सुरक्षित है, यह पढ़ें किडनी स्टोन लेज़र सर्जरी कितनी सुरक्षित है।
एक ही किडनी में कई पथरियां क्यों बनती हैं?
यह सवाल उतना ही ज़रूरी है जितना पथरी निकालना।
कई पथरियां बनने का मतलब अक्सर यह होता है कि शरीर में पथरी बनाने वाली स्थिति लगातार बनी हुई है। इसके आम कारण हैं:
- पेशाब की केमिस्ट्री में गड़बड़ी, जैसे साइट्रेट कम या कैल्शियम ज़्यादा
- पानी कम पीना या पेशाब कम बनना
- किडनी की बनावट, जैसे मेडुलरी स्पंज किडनी या किसी शाखा में पेशाब का रुकना, जो एक ही किडनी में पथरियों का गुच्छा बनाती है
- पेशाब का इन्फेक्शन
- पिछली सर्जरी में बचे टुकड़े, जिन पर नई पथरी बनती है
इसलिए सर्जरी के बाद पथरी की जांच (Stone Analysis) और 24 घंटे का पेशाब टेस्ट ज़रूर करवाएं। देखें 24 घंटे का यूरिन टेस्ट क्या जांचता है और किडनी स्टोन बार बार क्यों बनते हैं।
अगर पथरी दोनों किडनी में है, तो पढ़ें दोनों किडनी में पथरी हो तो क्या एक ही बार में सर्जरी हो सकती है।
अपने डॉक्टर से ये सवाल ज़रूर पूछें
- सारी पथरियों का कुल आकार और कठोरता कितनी है?
- पथरियां किडनी की किन शाखाओं में हैं? क्या कोई निचली शाखा में है?
- क्या आप एक सत्र में सारी पथरियां निकालने की योजना बना रहे हैं, या दो सत्र लग सकते हैं?
- टूटे हुए टुकड़े कैसे निकाले जाएंगे?
- यह कैसे पक्का होगा कि हर पथरी निकल गई, और फ़ॉलो अप स्कैन कब होगा?
- क्या पथरी जांच के लिए भेजी जाएगी?
हमारा किडनी स्टोन चेकर बताता है कि आपकी पथरी के साइज़ और जगह के हिसाब से आमतौर पर क्या इलाज होता है, और किडनी स्टोन ट्रीटमेंट पेज पर RIRS समेत सभी विकल्प दिए गए हैं।
अगर आपकी किडनी में कई पथरियां हैं और आप जानना चाहते हैं कि आपके लिए एक सत्र में सर्जरी संभव है या नहीं, तो डॉ. दीपांशु गुप्ता से परामर्श बुक करें। अपनी सीटी स्कैन रिपोर्ट और फ़िल्म साथ लाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या एक ही किडनी की कई पथरियां एक सर्जरी में निकल सकती हैं?
हां, ज़्यादातर मामलों में। RIRS में दूरबीन किडनी की अलग अलग शाखाओं तक जाकर एक ही बेहोशी में कई पथरियां तोड़ और निकाल सकती है, खासकर जब सारी पथरियों का कुल आकार लगभग 2 cm तक हो।
कितनी पथरियां एक बार में निकाली जा सकती हैं?
गिनती से ज़्यादा कुल आकार मायने रखता है। पांच छोटी पथरियां एक सत्र में आसानी से निकल सकती हैं, जबकि दो बड़ी पथरियों में ज़्यादा समय लग सकता है। जगह और कठोरता भी फ़ैसले पर असर डालती है।
कब दो बार सर्जरी करनी पड़ती है?
जब कुल पथरी बहुत ज़्यादा हो, पथरियां बहुत सख़्त हों, निचली शाखा में मुश्किल जगह पर हों, सर्जरी बहुत लंबी खिंच रही हो, या पेशाब में इन्फेक्शन हो।
कई पथरियों के लिए RIRS बेहतर है या PCNL?
कुल आकार 2 cm के आसपास या कम हो तो आमतौर पर RIRS। बहुत ज़्यादा पथरी या staghorn पथरी हो तो अक्सर Mini PCNL बेहतर रहता है। कुछ जटिल मामलों में दोनों एक साथ इस्तेमाल होते हैं।
क्या बहुत छोटी पथरियां भी निकालनी चाहिए?
अगर कोई तकलीफ़ या रुकावट नहीं है, तो कई बार उन पर नज़र रखी जा सकती है। लेकिन अगर सर्जरी हो ही रही है, तो उसी समय उन्हें भी साफ़ करना बेहतर है, क्योंकि बची हुई पथरी अगली पथरी का बीज बनती है।
कई पथरियों की सर्जरी में कितना समय लगता है?
यह पथरियों के कुल आकार, जगह और कठोरता पर निर्भर करता है। एक पथरी के मुकाबले ज़्यादा समय लगता है, और बहुत लंबे समय की ज़रूरत हो तो काम दो सत्रों में बांटा जा सकता है।
क्या कई पथरियों के बाद स्टेंट ज़रूरी है?
अक्सर हां, क्योंकि कई पथरियां निकालने में किडनी में ज़्यादा काम होता है और बारीक कण निकलते रहते हैं। स्टेंट आमतौर पर 1 से 3 हफ़्ते में निकाल दिया जाता है।
कैसे पता चलेगा कि सारी पथरियां निकल गईं?
सर्जरी के बाद फ़ॉलो अप स्कैन से। कई पथरियों वाले मामलों में यह खास तौर पर ज़रूरी है, क्योंकि यही पक्का करता है कि किडनी की हर शाखा साफ़ है।
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